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Chapter One

 बात हैं 1998-99 की,  रायसेन जैसीनगर मे एक राम नाम का व्यक्ति रहता था। उसके दो बेटे और चार बेटियां थी। उस समय इतने बच्चे होना आम बात थी। वह बहुत ही मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था। उसका शहर मे बोल बाला था। उसका ट्रांसपोर्ट का व्यापार था। उसकी बेटी तीसरे नंबर की बहुत ही चतुर व समझदार, होशियार थी। वो बहुत ही शरारती व चंचल थी। उनका एक बेटा भी बहुत समझदार था। बड़ी बेटी व दूसरे नंबर की बेटी को पढाई मे बिल्कुल भी रुचि न होने के कारण नही पढाया। ऐंसा नही की राम ने कोशिश नही की। राम अपने सभी बच्चो को पढ़ान लिखाना चाहता था, पर उनके केवल तीन बच्चे ही पढ़ सके। जिनमें से बेटी एक भी बार फैल नही हुई बल्कि बेटे दोनो  एक- दो बार फैल हो गए।  ओ, मैंने आपको किरदारों के नाम तो बताये ही नही।  तो सबसे पहले बात आती है राम की पत्नी की जिनका नाम जानकी है। जानकी व राम की पहली संतान का नाम सरोज, दूसरी का नाम सरस्वती, तीसरी का नाम सुभद्रा, चौथा बेटा जिसका नाम राज, और पांचवी बेटी का नाम मीनाक्षी, सबसे छोटे बेटे का नाम मनोज है।  उनकी तीनो बड़ी बेटी दादी- दादा की लाडली थी। दादी अपनी सारी बहु...